रात का अंधेरा... जेल की ऊंची दीवारें... लोहे के बंद गेट... और अचानक... दो महिला बंदियां जेल से गायब! आखिर रात के अंधेरे में दो महिला बंदियों को जेल से बाहर क्यों ले जाया गया?
वे कहां गईं किससे मिलने गईं? और कुछ देर बाद आखिर वापस जेल कैसे पहुंच गईं? क्या यह सिर्फ नियमों की अनदेखी थी... या फिर जेल की चारदीवारी के पीछे कोई ऐसा राज दफ्न है, जो अब धीरे-धीरे बाहर आने लगा है? मामला अजमेर सेंट्रल जेल स्थित महिला सुधार गृह का है, जहां फिलहाल जेलर का कार्यभार उप जेलर श्रीमती दिव्या चौधरी संभाल रही हैं। आरोप है कि उप जेलर दिव्या चौधरी एक महिला प्रहरी के साथ दो महिला बंदियों को बिना रजिस्टर में एंट्री किए जेल परिसर से बाहर लेकर चली गईं। न बंदियों के नाम दर्ज हुए... न बाहर ले जाने का कारण लिखा गया... और न ही जेल नियमों का पालन किया गया। ड्यूटी पर मौजूद महिला संतरी ने जब जेल नियमों के अनुसार रजिस्टर में इन्द्राज करने की बात कही, तो आरोप है कि उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया। इसके बाद संतरी ने तुरंत पूरे मामले की जानकारी जेल अधीक्षक आर. अनन्तेश्वरन को दी। सूचना मिलते ही आर. अनन्तेश्वरन महिला सुधार गृह पहुंचे और तत्काल बंदियों की गिनती करवाई। गिनती में रिकॉर्ड में दर्ज 108 महिला बंदियों के मुकाबले सिर्फ 106 महिला बंदियां ही मौजूद मिलीं। यानी... दो महिला बंदियां जेल में नहीं थीं। इसी के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और पूरे मामले की सूचना सीधे राजस्थान जेल मुख्यालय, जयपुर भेजी गई, लेकिन अब सवाल पहले से भी बड़े हो चुके थे... आखिर दोनों महिला बंदियों को कहां ले जाया गया था? क्या बाहर ले जाने की कोई वैधानिक अनुमति थी? अगर सब कुछ नियमों के तहत था... तो रजिस्टर में एंट्री क्यों नहीं हुई? और सबसे बड़ा सवाल... क्या इससे पहले भी महिला बंदियों को इसी तरह बिना रिकॉर्ड के बाहर ले जाया जाता रहा था? फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद संबंधित अधिकारियों को जयपुर स्थित जेल मुख्यालय तलब किए जाने की बात भी सामने आई है। अब हर किसी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है, क्योंकि वही बताएगी कि यह केवल नियमों की अनदेखी थी... या फिर जेल व्यवस्था में कोई गंभीर चूक।