अगर आप भी नौकरी की तलाश में हैं... और सोशल मीडिया या किसी एजेंसी के जरिए नौकरी का ऑफर मिलता है... तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि बेरोजगारी का फायदा उठाकर ठग अब युवाओं के सपनों का सौदा कर रहे हैं। वाराणसी से सामने आई यह खबर बताती है कि कैसे नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का खेल चल रहा था। लेकिन अब पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साइबर क्राइम पुलिस ने 'साइबर वज्र' अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य आरोपी दीपक कुमार शाह समेत कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 300 युवाओं को रेस्क्यू भी किया, जिन्हें नौकरी का झांसा देकर इस नेटवर्क के संपर्क में रखा गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी 'महादेव इंटरप्राइजेज' नाम की फर्जी कंपनी के जरिए युवाओं को 25 हजार रुपये महीने की नौकरी का लालच देते थे। नौकरी पक्की कराने के नाम पर हर अभ्यर्थी से 30 से 35 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि मुख्य आरोपी दीपक कुमार शाह के बैंक खातों में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब 4 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है, जिससे इस ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 20 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और दो लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा था और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। संभावना है कि इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। अगर कोई संस्था या एजेंसी नौकरी दिलाने के नाम पर पहले ही मोटी रकम जमा कराने की मांग करे... तो सतर्क हो जाइए। किसी भी नौकरी के ऑफर की पूरी जांच-पड़ताल करें और संदेह होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें। फिलहाल वाराणसी पुलिस इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।